ब्लॉग -5: एक अवांछित लेकिन “आवश्यक” दिल टूटना।

इस ब्लॉग को पढ़कर भी महसूस किया जा सकता है, क्योंकि आप में से कई लोगों ने इस अवांछित लेकिन “जरूरी” श्रवण को मेरे जैसा ही अनुभव किया होगा। यदि आपने पिछला ब्लॉग नहीं पढ़ा है तो यहां क्लिक करें और पढ़ें। बहुत लंबे इंतजार… Read More »ब्लॉग -5: एक अवांछित लेकिन “आवश्यक” दिल टूटना।

ब्लॉग-4: ज्यादा अभ्यास, ज्यादा विकास

यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ने का समय है। यदि आपने पिछला ब्लॉग नहीं पढ़ा है तो कृपया यहाँ क्लिक करें और पकड़ें। ज्यादा अभ्यास, ज्यादा विकास, इसका क्या अर्थ है? सौभाग्य से इस बार बल्लेबाजी करने का ‘लंबा इंतजार’ ज्यादा लंबा नहीं रहा। एक दिन,… Read More »ब्लॉग-4: ज्यादा अभ्यास, ज्यादा विकास

ब्लॉग-3: माटुंगा का ‘न्यू हिंद क्रिकेट क्लब’

माटुंगा का ‘न्यू हिंद क्रिकेट क्लब’ रोजाना सुबह ७.०० बजे शुरू होता था और आम तौर पर रविवार को मैच का दिन होता था। सुबह ६.१५ बजे तक क्लब पहुंचने के लिए मुझे सुबह छह बजे घर से निकलना पड़ता था। मैदान और वार्म-अप के… Read More »ब्लॉग-3: माटुंगा का ‘न्यू हिंद क्रिकेट क्लब’

ब्लॉग-२ “लंबे इंतजार का अंत”

तो कहानी में आगे बढ़ते हैं। लंबा इंतजार के बाद मेरे क्रिकेट का प्रवास कैसे शुरू हुआ इसके बारे में यह ब्लॉगहै। अगर किसी ने हमारा पहला ब्लॉग नहीं पड़ा तो इस लिकं पर क्लिक करें और जाने की इस कहानी की शरुुआतकैसे हुई। सन… Read More »ब्लॉग-२ “लंबे इंतजार का अंत”

ब्लॉग-१ “हर कहानी के पीछे एक कहानी होती है”

सन १९३८, एक युवक एक छोटे गांव सोळू- महाराष्ट्र के छोटे शहर पुणे से अपने सपनों, दूरदृष्टि और धैर्य केसाथ मुंबई शहर आया। मुंबई जैसे शहर में साधारण मध्यम वर्गीय परिवार को चरितार्थ चलाना आसान नहीं होता। परंतु वह यवुक अपना मन बना चुका था… Read More »ब्लॉग-१ “हर कहानी के पीछे एक कहानी होती है”